अमृत नॉवल में जसबीर ने बिलकुल नए विषय को चुना है । समकाली मनुष्य का अस्तित्वी समस्याओ के साथ दो -चार होने वाला यह पंजाबी का पहला दार्शनिक नॉवल है । यह दार्शनिक नॉवल अस्तित्वी .आतम सत्य ,संघर्ष बोध और परिवर्तन का दर्पण है । यह नावल एक पात्री,आतम बोधी और स्वेजीवनी परक है ।
..............................आजईब कमल (पर्जोग्वाद के संस्थापक )
जसबीर के इस स्वेजीवनिक दार्शनिक नॉवल ' अमृत ' के गहरे अध्यन से मुझे उसकी बोधिक और दार्शनिक
विकास यात्रा की झलक मिली । मैंने उसको एक आम नौजवान से संवेदनशील पंजाबी कवि और एक कवि से एक समर्थ जज्ञासु और जज्ञासु एक चेतन दार्शनिक लेखक होते हुए देखा है .यह नॉवल पड़ने से पहले मै
समझता था के जीवन ज्ञात से अज्ञात तक की यात्रा है । पर यह नॉवल पड़ने के वाद मुझे महसूस हुआ के जीवन ज्ञात से ज्ञात नही बलकी अज्ञात से अज्ञात तक की ही यात्रा है ।
ग.जस (प्रसिद्ध सूफी कवि)
Sunday, September 13, 2009
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